सौभागी संघ हमारा (लय-जहाँ जहाँ डाल डाल पर )
जहां श्रद्धा सेवा और समर्पण की बहती है धारा।।
संघ हमारा पावन मंदिर, यही देव यही पूजा, यही जिनालय, यही शिवालय, तीर्थ न कोई दूजा-2
इसके कण-कण में गूंजित है-जय भिक्षु का नारा ।।1।।
सौभागी..
उन बलिदानी मुनि सतियों के, चरणों में सौ सौ वन्दन, जिनके त्याग तपोबल से, गण, धूलि बनी है चन्दन-2 गणनन्दन वन जिन्हें लगा, अपने प्राणों से प्यारा।।2।।
सौभागी..
धर्म क्रांन्ति की ईटों से, यह संघ भवन निर्मित हैं,
ईंट-ईंट पर मर्यादा का, दिव्य मंत्र अंकित हैं-2
प्राणवान यह संघ बना हैं, अनुशासन के द्वारा ।।3।।
सौभागी..
संघ शीतघर लगता मनहर, ज्यों फूलों की घाटी,
मुस्कानों के झरनों से, सुजला सुफला यह माटी-2,
रेखा चित्र भिक्षु का, जय ने, इसको खूब निखारा।।4।।
सौभाग……….
गण गणपति सम्बन्ध दिनों दिन, होता जाए गहरा,
करें सुरक्षा ‘निज पर शासन-फिर अनुशासन पहरा-2, उपवन के हर पौधे को तुलसी का सबल सहारा ||5|| सौभाग…..
(लरा-जहाँ जहाँ डाल डाल पर )