घुंघरू छम छमा छम छण णा ण ण बाजे रे।
हिवड़े रे मंदिर में प्रभु महावीर विराजै है।। स्थायी।।
कुण्डलपुर में जन्म्या भगवन, घर-घर मंगलाचार।
देव – देवियां मंगल गावै, प्रभु लियो अवतार।।१।।
संयम रे मारग पर चाल्या, कष्ट सह्या अनपार।
वर्धमान स्यूं वीर बण्या प्रभु, मन में समताधार ।12।।
अन्तर्यामी समदर्शी बण, पायो केवल ज्ञान।
उपसर्गा रे तप में तप कर, बणग्या आप महान ।।३।।
संगम, अर्जुन, चण्ड जिस्यां री, आतम ज्योति जगाई। एक – एक प्राणी ने थे तो. मुगति राह दिखाई।।4।।
करूणा सागर अमरित गागर, जैन जगत सिणगार।
जो ध्यावैला चित्त लगाकर, होसी बेड़ो पार
अजर अमर ज्योतिर्मय प्रभुवर जीवन सविधा।
श्रद्धा रे भाव स्यू सुव्रत, नित उत्त करे प्रणाम।।