श्रावक निष्ठा पत्र
मैं जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का अनुयायी श्रावक हूँ / श्राविका हूँ। इसका मुझे गौरव है। में इसे जीवन-विकास का तथा समस्याओं के समाधान में सबसे बड़ा आलम्बन मानता हूँ / मानती हूँ। अतः अपने दायित्व निर्वाह तथा आस्था की पुष्टि के लिए मैं इन संकल्पों को स्वीकार करता हूँ। करती हूँ-
1. मैं आचार्य भिक्षु की मर्यादा, तेरापंथ धर्मसंघ तथा शासनपति के प्रति समर्पित रहूँगा/रहूँगी।
2. मैं धर्मसंघ की अखण्डता के लिए सतत जागरूक रहूँगा/रहूँगी। दलबन्दी को प्रोत्साहन नहीं दूंगा/दूंगी।
3. मैं जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ से मुक्त व्यक्ति (टाळोकर) को प्रश्रय नहीं दूंगा/दूंगी।
4. मैं आचार्य की आज्ञा के प्रतिकूल प्रवृति को समर्थन नहीं दूंगा/दूंगी।
5. धर्मसंघ के किसी साधु-साध्वी में दोष जान पड़े तो उसका अन्यत्र प्रसार किए बिना यथौचित्य स्वयं उसे अथवा आचार्य आदि उपयुक्त व्यक्ति को जताऊंगा/जताऊंगी।
6. में प्रत्येक शनिवार को सांय सात से आठ के बीच सामायिक करने का यथासंभव प्रयत्न करूंगा/करूंगी।
7. मैं सम्यक्त्व दीक्षा के चारों नियमों का जागरूकता पूर्वक पालन करूंगा/करूंगी।