(लय- तुमसे लागी लगन)
दिनेश मुनि
तप से कर्म हिले, तप से मोक्ष मिले जोअपनाए
तप की गंगा में नित्य नहाये
भौतिक सुख के लिये तपनहीं करना
धन दौलत के लिये तपनहीं करना
आत्मा शुद्ध बने, आत्मा बुद्ध बने
लक्ष्य बनाएं तप की गंगा में नित्य-नहाये
तप के साथ स्वाध्याय चलेगा
जीवन मे अभिनव दीप जलेगा
धार्मिक शिखर चढ़े जीवन ग्रन्थ पढे, बढते जाये
कर्म शरीर प्रकमपित होगा कर्म समूह भी कंपित होगा। तप से रंग खिले दुख से मुक्ति मिले ,कर्म खपाये
मार्ग बताए है मोक्ष महल के
दर्शन ज्ञान चरण तप झलके
तप से तन चमके,
तपसे मन महके, सबकोभाये
साबुन पानी से तन की सफाई ।
तप से आत्कीमा होती धुलाई।
अन्तर ज्योति जले, शक्ति स्त्रोत खुलें
प्रभुता पाए