* महाप्रज्ञ श्रमण स्तुति।
(लय – दिल हूम हूम करे)
तेरी जय जय जय हो तेरी जय हो तेरी जय जय जय हो तेरी जय हो हर भक्त पुकारे भगवन तुम अजर अमर अक्षय हो
(1)
गर्मी की दुपहरी में बादल बन छाते, तुम,
बादल जब-जब बरसे छतरी बन जाते, है
शरण तिहारी पग-पग पर प्रभु सुखकारी,
चरणों की सेवा हरती विपदाएं सारी……….
(2)
हर ऋतु हर मौसम में मुखडा मुस्काए
तेरा दर्शन करता उसकी पीड़ा पी जाए
मन मोहे मोरा तेरी मूरत मोहनिया,
दुःख कटते सारे मिलती है अनहद खुशियां।
(3)
मैं जब-जब देखूं तुम्हें सुख ही सुख मिलता, तुम,
जब-जब देखो मुझे मेरा दिल खिलता,
ओ मेरे गुरूवरम, तेरे नैना प्यास बढ़ाए,
मैं जब भी निहारू, त्राटक मेरा सध जाए……।
(4)
पर्वत-पर्वत गाए तेरी साहस गाथा हर,
निर्झर साक्षी है साक्षी सागरमाथा,
बर्फीली हवाएं बरसा जल बरसे ओले,
रौंदी बाधाएं ये चरण कभी ना डाले……