Bhajiye Nitya Swami Supas A

7

(लय : कृपण दीन अनाथ ए)
सुपार्श्वप्रभु स्तवन
भजियै नित्य स्वामी सुपास ए।
1. सुपास सातमां जिणंद ए, ज्यांनै सेवै सुर नर बंद ए। सेवक पूरण आश ए, भजिये नित्य स्वामी सुपास ए॥
2. जन प्रतिबोधण काम ए, प्रभु बागरै वाण अमाम ए। संसार स्यूं हुवै उदास ए, भजिये नित्य स्वामी सुपास ए॥
3. पामैं कामभोग थी उद्वेग ए, बलि उपजै परम संवेग ए। एहवा तुम वच सरस विलास ए, भजियै नित्य स्वामी सुपास ए॥
4. घणी मीठी चक्री नीं खीर ए, बलि खीर-समुद्र नो नीर ए। एहथी तुम वच अधिक विमास ए, भजियै नित्य स्वामी सुपास ए॥
5. सांभल नै जनव्रन्द ए, रोम-रोम में पामै आनंद ए। ज्यांरी मिटै नरकादिक त्रास ए, भजियै नित्य स्वामी सुपास ए॥
6. तूं प्रभू ! दीन-दयाल ए, तूं ही अशरण-शरण निहाल ए। हूं हूं तुम्हारो दास ए, भजियै नित्य स्वामी सुपास ए॥
7. संवत उगणीसै सोय ए, भाद्रवा सुदि तेरस जोय ए। पहुंची मन नीं आश ए, भजियै नित्य स्वामी सुपास ए॥
लय : कृपण दीन अनाथ ए

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top