दीपावली पर्व पूजा (जैन विधी से)
“आवश्यक-सामग्री”
अक्षत (चावल) कुंकुम, मोली, गुड़, जल-कलश, अगरबत्ती, पटृ, सिक्के, लाल वस्त्र, घृत का दीपक, थाल एवं मंगल-भावना यंत्र आदि।
विधिः सर्व प्रथम पूर्वाभिमुख होकर “मंगल भावना-यंत्र को उचित स्थान पर स्थापित करें। थाल के मध्य में कुंकुम से अर्हम लिखें। पट्ट पर लाल-वस्त्र बिछाकर चावल से बनाएं।
सर्व-मंगल-मांगल्यं, सर्व-कल्याणकारणम् ।
प्रधानं सर्वधर्माणां, जैन जयतु शासनम् ॥
इस मंत्रोचारण के साथ स्वयं के तथा परिवार के प्रमुख व्यक्ति के मस्तक पर तिलक करें और हाथ पर मोली बांधे।
मंगलं भगवान् वीरो, मंगले गौतमो गणी । मंगलं स्थु लिभद्राद्याः, जैन धर्मोऽस्तु मंगलम् ।।
इस मंत्रोचारण के साथ कलम आदि के मोली बांधे। तथा उपस्थित सदस्यों के तिलक करें।


सभी सदस्य एकाग्र होकर सामूहिक रूप से निम्न मंत्रों का उच्चारण करें
णमो समणस्स भगवओ महावीरस्स
ॐ
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं अर्हद्भ्यो नमो नमः
ऊं ह्रीं श्रीं अर्हं सिद्धेभ्यो नमो नमः
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं आचार्येभ्यो नमो नमः
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं उपाध्यायेभ्यो नमो नमः
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं गोतमस्वामिप्रमुख सर्वसाधुभ्यो नमो नमः
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं श्री-चिन्तामणि-कामधेनु-कल्पवृक्ष-पुरुषादानीय-श्रीपार्श्वनाथ-धरणेन्द्र-पद्मावती-सहिताय-मम मनोवांछितं पूरय पूरय जय-विजय करणाय नमः।
(बही खातों के मुख्य पृष्ठों पर निम्नांकित शब्द वन्दना अंकित करें)
श्रीं
श्रीं श्रीं
श्रीं श्रीं श्रीं
श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं
श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं
णमो समणस्स भगवओ महावीरस्स णमो अरहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं। एसो पंच णमुक्कारो, सव्व पावपणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं ॥
श्री भगवान महावीर जैसा दिव्य-ज्ञान, श्री गौतम गणधर जैसा भव्य ध्यान, श्री भरत चक्रवर्ती जैसी अनासक्ति, श्री बाहुबलि जैसी शक्ति, श्री अभय कुमार जैसी निर्मल बुद्धि, श्री धन्ना शालिभद्र जैसी ऋद्धि-सिद्धि, सेठ सुदर्शन जैसा शील, श्री कयवन्ना जैसा सौभाग्य, मातामोरां देवी जैसी सुख श्री के लिए शुभवीर संवत……..मिति…….. ..वार.. दिनांक………. शुभ लगन एवं शुभ……… नक्षत्र में श्री दीपावली के मंगल पर्व पर भगवान महावीर के मंगलमय स्मरण के साथ बही खातों का सानन्द शुभारंभ किया।
