Suvichar (TAPSYA,KSHAMA–)

*निर्जरा का प्रमुख साधन है तप
आत्म चिन्तन तपस्या है
स्वाध्याय मे लीन रहना तपस्या है
रात्रिभोजन तपस्या है
प्रतिकूलता को सहना तपस्या 
प्ररिग्रह के प्रति अनासक्ति तपस्या 
इच्छाओका अल्पीकरण तपस्या खुद 
खाद्य पदार्थो की सीमाकरता तपस्या 
अपना स्वार्थ विसर्जन तपस्या 
क्षमा जब वाणी में उतरती है तो वाणी अमृत बन जाती है
नेत्र से छलकती है तो नेत्र मैत्री के झरने बन जाते हैं 
*क्षमा जब हृदय में उतरती है तो हृदय शांति का घर बन जाता है
क्षमा जब रिश्तो को छूती है तो रिश्ते नफरत की जंजीरों से मुक्त बन जाते हैं 
क्षमा जब परिवार में बस जाती है तो परिवार स्वर्ग बन जाते हैं क्षमा केवल दूसरों को देना ही नहीं स्वयं को मुक्त करने का उपाय है
*स्नान तन को, ध्यान मन को, दान धन को, योग जीवन को का प्रार्थना आत्मा को, व्रत स्वास्थ्य को, क्षमा रिश्तो को परोपकार किस्मत को शुद्ध कर देता है
*संगति कीजे जाण, पानी पीजे छाण
*कमी नहीं है खाणे री फिर भी तप रो कोड 
बो ही असली त्यागी है जो प्राप्त वस्तु दे छोड़
 *जो वस्त्र को जला दे उसे आगकहते है
जो जीवन जला दे उसे रागकहते है
जो जीवन को उठा दे उसे त्याग कहते है
जो मुक्ति में पहुंचा दे उसे वैराग्य कहते 
* कई जीत बाकी है कोई हार बाकी है।
अभी तो जिन्दगी का सार “बाकी है
यहाँ से चले थे नई मंजिल के लिये 
यहएक पन्ना थाअभी वो किताब बाकी है
*ओरो की झट देखना राई जितनी भूल 
अपनी भूल न देखना पर्वत जितनी स्थूल 
* करो भला होगा भला है यह नीति उदार। 
रमण सदा निज रूप में मानवका आचार 
* निंदा तो निजकी करें गुणीजन के गुणगान 
देखे अपने दोष को मानव वहीं महान
 भूल ढूंढना है भइऔरो की आसान. 
समझे जो निज भूल को मानव वही महान
* क्षमा याचता नित् करे जोड़ जोडकरहाथ 
किंतु न भूले बेरको तो उपर की बात ।
*भूल न अपनी देखता है अभिमान अपार 
 शांति उसे कैसे मिले जहां न गुण से प्यार ।।
*आने वाली मौत रो मन पर लाद न भार —
जी नै रा पल जो मिल्या वारो रुपनिखार ।।
*अतिथि देव बन आप पधारे स्वागत हो स्वीकार।
 द्वार हमारे आप आ गये सहज लुटाते प्यार 
टूटने लगे हौसले तो ये याद रखना बिना मेहनत के तख्तो-ताज नहीं मिलते ढूंढ़ लेते हैं अंधेरों में मंजिल अपनी क्योंकि जुगनू कभी रौशनी के मोहताज़ नहीं होते !
*मेहनत के दिए जलाये जा सफलता के परचम लहराए जा दुःख सुख तो आते रहेंगे जीवन में तू जीवन को आगे बढ़ाए जा !
कुछ नहीं मिलता दुनिया में मेहनत के बगैर, 
मेरा अपना साया भी धूप में आने से मिला !
तेरी मेहनत कल जरूर रंग लाएगी 
आज का की ये कड़ी मेहनत कल खुशियों की बारात लाएगी !
संघर्ष में आदमी अकेला होता है 
सफलता में दुनिया उसके साथ होती है 
जिस-जिस पर ये जग हँसा है उसीने इतिहास रचा है !

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top