इस भव में जो न मिले
(तर्ज : बस यही अपराध हर बार करता हूँ)
इस भव में जो ना मिलें, परभव में मिलता है
,अपने-अपने कर्मों का, फल सबको मिलता है।।
है वो भाई, दोनों ही तो, दुनियाँ के मेले में,
एक दर दर का भिखारी, दूजा महलों में,
होते पैदा एक से, नहीं भाग्य मिलता है।। अपने ।।
सीप है दो एक सी, किस्मत निराली है,
एक में मोती भरे, और दूजी खाली है,
समुद्र के पानी में, इनको जन्म मिलता है।। अपने ।।
फूल दो हैं, एक प्रभु चरणों में चढ़ता है,
दूसरा अर्थी पे पड़ा, वो खाक में मिलता है,
फूल दोनों, एक ही चमन में खिलते हैं।। अपने ।।
एक पत्थर की है मूरत, पूजा करते हैं,
दूसरा सड़कों में जड़ा, जिस पर हम चलते हैं,
पत्थर दोनों, एक ही पर्वत से निकलता है।। अपने ।।
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जरा तोल के तो मीठा बोलो
(तर्ज जरा सामने तो आओ)
जरा तोल के तो मीठा बोलो,
कड़वा बोलने में कुछ भी न सार है
चला जाता है एक दिन आदमी,
रह जाती वचन की मार है। जरा
सुई से कांटा फौरन निकलता,
कुवचन न किंतु निकलता है,
चाकू का घाव तो मिटता दवा से,
यह तो हमेशा जलता है, खोता वर्षों का पल में प्यार है,
जहाँ मैत्री थी वहाँ अब खार है चला जाता है एक दिन आदमी, रह जाती वचन की मार है।
जरा होकर के अंधा गुस्से में आदमी,
चाहे जो मुँह से कहता है
खुलती है आंखे तब दिल में रोता,
किन्तु न फिर कुछ बन पाता है मरे एक वचन से चार है, सारे घर का हो गया संहार है चला जाता है एक दिन आदमी, रह जाती वचन की मार है।
जरा मीठे वचन में लगती नहीं दमड़ी,
कड़वे से हीरे नहीं मिलते,
अमृत के बदले फिर इस इस जुबां से,
फिर क्यूं हलाहल है झरते,
जीभ रतनों का भारी भंडार है, होंठ दोनों ही पहरेदार है चला जाता है एक दिन आदमी, रह जाती वचन की मार है।नहीं चाहिए दिल दुखाना किसी का
(तर्ज – मुझे प्यार की जिन्दगी देने वाले)
नही चाहिये दिल दुखाना किसी का
सदा न रहा है, सदा न रहेगा, जमाना किसी का-2
आएगा बुलावा तो जाना पड़ेगा,
सिर आखिर तुझको झुकाना पड़ेगा
वहाँ न चला है, वहाँ न चलेगा, बहाना किसी का। नही चाहिये
शोहरत तुम्हारी रह जायेगी ये,
दौलत यही पर रह जायेगी ये
नही साथ जाता है, नही साथ जायेगा,
खजाना किसी का। नही
दुनियां का गुलशन सजा ही रहेगा,
ये तो जहाँ में लगा ही रहेगा।
आना किसी का जग में, जाना किसी का नही चाहिये….