Goral Mhari Re

गणगौर चुंदड़ी 

(लय- बनो म्हारो रे)
गौरल म्हारी रे या लाल चुनर म लाग प्यारी ये, गौरल म्हारी रे
पतला, पतला होंठा पर लाली रो बोझ भारी रे, 
जद या बोली बोलना लाग प्यारी रे, 
गौरल म्हारी रे गौरल म्हारी रे
2) लम्बा लम्बा केशा पर गजरा रो बोझ भारी रे
 2 जद म्हारी गोरां चाल न लाग लाग प्यारी रे, 
गौरल म्हारी रे….।।1।।
3नाजुक, नाजुक हाथाँ पर चुडला रो बोझ भारी रे
जद या पतला फलका बेल – लाग प्यारी रे 
गौरल म्हारी रे
नाजुक, नाजुक कमर पर, कन्दोरा रो बोझ भारी रे 
जद या घूमर घाल न लाग लाग प्यारी रे गौरल म्हारी रे।।
नाजुक, नाजुक पावाँ पर पायल रो बोझ भारी रे
 ठुमक ठुमक कर जद या चालेलाग प्यारी रे 
गौरल म्हारी रे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top