(लय–आ चलके तुझे मैं लेके चलू )
महाप्रज्ञ तेरा गुणगान करू मन की ये आश फले
पर शब्द नहीं क्या गीत लिखु, मन श्रद्धा दीप जले
① आगम के सक्षमज्ञाता हो जैन जगत के सूरज
अहिसा के पदचिन्हो पर शान्ति का सवेरा जागै
अणुव्रत प्रेक्षा घर-2 पहुंचे, जन-2 की प्यास बने
② प्रभु वीतरागता तेरी विरले संतो में देखी
अदभुत आलोक निहारा प्रज्ञा मूरत मन भाये।
शत-२वन्दन करते गुरुवर, संघ गौरव शान बढ़े।