(तर्ज : मैया नवरातों में…..)
जीवन का भरोसा नहीं, कब मौत आ जायेगी, काया और माया तेरी, तेरे साथ ना जायेगी।।
काया पे गूमान ना कर, ये तो माटी का खिलौना है, तेरा चाहा होना नहीं, लिखा भाग्य का होना है, तेरा और मेरा छोड़ – 2, जीवन ज्योति बूझ जायेगी ।। 1 ।।
दौलत पे गुमान ना कर, ये तो हाथ का मेला है, राजा है तो रंक कोई, सब किस्मत का खेला है, झूठी है ये माया नगरी – 2, ये तो पल में बदल जायेगी ।। 2 ।।
दो दिन का मेला है, सब किस्मत का खेला हैं, जाये नहीं साथ कोई, तुझे जाना अकेला है, पलक झपकते ही – 2, दुनियाँ तुझे ठुकरायेगी ।। 3 ।।
रिश्तों पे भरोसा ना कर, दुनियाँ से तूं आशा ना कर तरना है तो भवसागर, गुरूवर का तूं सुमिरन कर मक्ति की शक्ति से 2, जीवन नैय्या तर जायेगी ।। 4।