Form (विधा)

Batisi, Bhat, Mayra

Mhar Banade To Byav Mandyo

मायरा महारे बनड़े रो ब्याह मंड्‌यो विरोजी आया आगंणियै  सारे घर ने चाव चढ्‌यो बिरोजी आया आंगणिये चंदा जैसो मुखड़ों थारो लागे प्यारो प्यारो  भाभी म्हारी शरद पुर्णिमा चारों ओर उजियारो -2  थारी जोडी-2 अमर रहे विरोजी आया आंगणिये नौलख हीरारी चुन्दडी ल्याया विरोजी म्हारा  बाई ने चुंदड उठावा बांकी नजर उतारा  सारा घरवाला-निरख रहया, […]

Adhyatmik, Kabir, Satsang, Vairagy

Uth Jag Musafir Bhor Bhayi

1 उठ जाग मुसाफिर उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहां जो सोवत है। जो सोवत है सो खोवत है, जो जागत है सो पावत है॥ उठ नींद से अखियां खोल जरा,  और अपने प्रभु से ध्यान लगा।  यह प्रीत करन की रीत नहीं,  प्रभु जागत है, तू सोवत है। उठ जाग मुसाफिर… जो

Batisi, Bhat, Mayra

Mere Bhaiya Chale Aana

(लय- मैं आई तेरे पूजन को तुम्हें मैं क्या चढ़ाउं भगवन् ) (भात गीत) मेरे भैया चले आना, तुम्हे बहना बुलाती है  समय पर भात ले आना, मेरे बेटे की शादी है। ना हो चाहे माँग का टीका, ना हो चाहे कान का झुमका, संग परिवार के आना। मेरे बेटे की शादी हैं, मेरे भैया……….

Chaubisi

Mahavir Prabhu Stavan 24

24 chobisi महावीर प्रभु स्तवन नहीं इसो दूसरो जगवीर,  उपसर्ग सहिवा अडिग जिनवर, सुरगिरि जेम सधीर। 1. चरम जिनेन्द्र चौबीसमा रे, अघ हणवा महावीर। विकट तप वर ध्यान धर प्रभु, पाया भव जल तीर ॥ 2. संगम दुख दिया आकरा पिण, सुप्रसन्न निजर दयाल। जग उद्धार हुवै मो थकी रे, ए डूबै इण काल ॥

Chaubisi

Parshvnath Stavan 23

23 पार्श्वनाथ प्रभु स्तवन पारस देव! तुम्हारा दर्शन भाग भला सोई पावे हो।  भाग भला सोई पावे, हूं वारि जाऊं, जीव मगन हो ज्यावै हो पारस देव । 1. लोह कंचन करै पारस काचो, ते कहो कर कुण लेवे हो। पारस तू प्रभू साचो पारस, आप समो कर देवै हो । 2. तुझ मुख-कमल पासै

Chaubisi

Arishat Nemi Prabhu Stavan 22

22 अरिष्टनेमि प्रभु स्तवन प्रभु नेम स्वामी! तूं जगनाथ अंतरयामी। रिठनेम स्वामी! तूं जगनाथ अंतरयामी ॥ 1. तूं तोरण स्यूं फिर्यो जिन-स्वाम, अद्भुत बात करी तें अमाम। प्रभु नेम स्वामी! तूं जगनाथ अंतरयामी ॥ 2. राजिमती छांडी जिनराय, शिव-सुन्दर स्यूं प्रीत लगाय। प्रभु नेम स्वामी! तूं जगनाथ अंतरयामी॥ 3. केवल पाया ध्यान वर ध्याय, इन्द्र

Chaubisi

Nami Prabhu Stavan 21

21 नमि प्रभु स्तवन प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे। मुझ प्यारा प्राण आधारा ॥ 1. नमिनाथ अनाथां रा नाथो रे, नित्य नमण करूं जोड़ी हाथो है। कर्म काटण वीर विख्यातो, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥ 2. प्रभु ध्यान सुधारस ध्याया रे, पद केवल जोड़ी पाया रे। गुण उत्तम-उत्तम आया, प्रभु नमिनाथजी मुझ प्यारा रे॥ 3.

Chaubisi

Muni Svuart Prabhu Stavan

20 मुनिसुव्रत प्रभु स्तवन प्रभूजी ! आप प्रबल बड़ भागी। त्रिभुवन दीपक सागी रा॥ 1. सुमित्रनन्दन श्री मुनिसुव्रत, जगतनाथ जिन जाणी। चारित्र ले केवल उपजायो, उपशम रस नीं वाणी रा॥ 2. चौतीस अतिशय पैंतीस वाणी, निरखत सुर इन्द्राणी। संवेग रस नीं वाणी सांभल, हरष स्यूं आंख्यां भराणी रा॥ 3. शब्द-रूप-रस-गंध-परस, प्रतिकूल न हुवै तुम आगे।

Chaubisi

Malli Prabhu Stavan

मल्लि जिनेश्वर नाम समर तरण शरण आयो। 1. नील वर्ण मल्लि जिनेश्वर, ध्यान-निर्मल घ्यायो। अल्प काल मांहि प्रभु, परम-ज्ञान पायो । 2. कल्प पुष्पमाल जेम, सुगंध तन सुहायो। सुर-वधू वर नयन-भ्रमर, अधिक ही लिपटायो। 3. स्व पर चक्र विविध विघन, मिटत तो पसायो। सिंघनाद थकी गजेन्द्र, जेम दूर जायो । 4. वाण विमल निमल सुधा-रस

Chaubisi

Ar Prabhu Stavan

18 अर प्रभु स्तवन अर जिनराज। मोनें प्यारा लागै छै जी मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥ 1. अर जिन कर्म-अरी नां हंता, जगत उधारण जहाज। मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥ 2. परीषह उपसर्ग रूप अरी हण, पाया केवल पाज। मोनें वाल्हा लागे छै जी अर जिनराज ॥ 3. नैण

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