स्वागत गीत
स्वर्णिम दिन् ये उदित हुआ मन हरसाये
पंचम स्वर में कोयलिया येगीत सुनाएं
स्वागत की बेला मन महफिल महकाए ।
सुखसाता पूछे हम सारे विधिवत वंदन करते क
सर्दी गर्मी तूफानी लहरों लहरों को आये सहते ।।
प्यासी अंखियां दर्शन पाकर विकसाये
1)
खुशियों का सागर लहराया पुलकित दसों दिशाएं
श्रद्धा अक्षत, कुमकुम लाकर मिलजुल तुम्हे बधाएं
सिंचन पा तेरा धरती अब सरसाये
• अनुव्रत प्रेक्षा जीवन का विज्ञान सबको सिखाएं, मानवता की ले मशाल हम, नैतिक अलख जगाएं
तुलसी के सपनों को पूरा कर पाये
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ज्ञान ध्यान स्वाध्याय सुधा का अमृतपान कराएं
संस्कारो से भर दो झोली प्रज्ञादीप जलाएं
तेरी शुभ सन्निधि में कुछ कर दिखलाएं ॥