यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
(लय- सूरजकब दूरगगन से)
अच्छे है भाग्य हमारे जो आप यहाँ है पधारे
खिल उठी है बगिया दिल की, मन हर्षित हुये हमारे
प्रांगण में आपका स्वागत है कि तन मन से स्वागत है नन्हे नन्हे हाथों से सुन्दर हार बनायें
भाव भरे पुष्पों से श्रद्धा माल सजाये
स्वीकार हार कर लेना आशीष हमे दे देना
जो खता हुई है हमसे तो उसे माफ कर देना
प्रांगण आपका स्वागत है कि तन मन से —
अम्बर में जैसे चमके सूरज चांद सितारे
हे अतिथि आप के आने से दिखते वही नजारे
जिसकी हमे प्रतीक्षा वो शुभ अवसर है आया,
नैनो में चमक आयी जो दीदार आपका पाया
प्रांगण में आपका स्वागत है —