(लयः- देख तेरे संसार की)
वर्षीतप धाराहै इन्होंने, बहिना (भाई )है पुण्यवान।
इनके खूब करो गुणगान ॥ रहे समाधि और सुखसाता, यही करे अरमान।
इनके खूब करो गुणगान ॥
1. बहुत कठिन है, तप का करना, बहुत कठिन है धीरज रखना, बहुत कठिन है लक्ष्य को वरना बहुत कठिन है इस पथ पर चलना, हममें भी कुछ शक्ति जागे, ऐसा दो वरदान।। इनके खूब करो गुणगान
2. तन से मन को दूर किया है, तप से निर्मल बना लिया है, इस जग को संकेत दिया है, तप का अमृत इसने पिया है, शूरवीर ही हिम्मत करके, करते तप और ध्यान।। इनके खूब करो गुणगान-2
3. वीर प्रभु जी आशीष दीज्यो वर्षीतप वालो के साता रहिजो, शासनमाता शरणा लीज्यो, अपना-अपना कारण सीजो कुल में धूम मची है, बढ़ाई शासन – शान।। इनके खूब करो गुणगान