(स्वागत गीत – मै तो भूलचली बाबुल का देश)
वीरवाणी का पावन सन्देश शुष्क धरा सरस गई
ये तो झूम् उठा उत्तर प्रदेश, गुरुकी कृपा बरस रही
दीप जलाये हार सजाये प्रमुदित स्वरो से स्वागत गीत गाये
मंगल मय हो गुरु का प्रवेश
गुरु की कृपा बरस रही
संगम की धरती पे संयम की धारा ।
चारित्र ज्ञान दर्शन का नजारा ।।
मेली गंगा की प्रार्थना विशेष
(स्वच्छ बन जाये यहाँ का परिवेश।)
सागर से गहरे हिमगिरि सी ऊंचाई’
चदाँ सी शीतलता सबके मन भाई।
चम चमाये रवि जैसा तेज ॥
महिला मंडल करता चरणों में वंदन।
गुरु रु इंगित पर सबकुछ समर्पण ।
गुरु ब्रह्मा विष्णु और महेश ॥