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वासुपूज्य प्रभु स्तवन
प्रभु वासुपूज्य भजलै प्राणी!
1. द्वादशमा जिनवर भजिये, राग द्वेष मच्छर माया तजिये। प्रभु लाल वरण तन छिब जाणी, प्रभु वासुपूज्य भजलै प्राणी॥
2. वनिता जाणी वेतरणी, शिव-सुंदर बरवा हूंस घणी। काम-भोग तज्या किम्पाकाणी, प्रभु वासुपूज्य भजलै प्राणी॥
3. अंजन-मंजन स्यूं अलगा, बलि पुष्प विलेपन नहिं विलगा। कर्म काट्या ध्यान-मुद्रा ठाणी, प्रभु वासुपूज्य भजलै प्राणी॥
4. इन्द्र थकी अधिका ओपै, करुणागर कदेय नहीं कोपै। वर साकर दूध जिसी वाणी, प्रभु वासुपूज्य भजलै प्राणी॥
5. स्त्री स्नेह पासा दुर्दन्ता, कह्या नरक निगोद तणां पंथा। इह भव पर भव दुखदाणी, प्रभु वासुपूज्य भजलै प्राणी॥
6. गज कुंभ दलै मृगराज हणी, पिण दोहिली निज आतम दमणी। इम सुण बहु जीव चेत्या जाणी, प्रभु वासुपूज्य भजलै प्राणी॥
7. भाद्रवी पूनम उगणीसो, कर जोड़ नमूं वासुपूज्य ईसो। प्रभु गातां रोम-राय हुलसाणी, प्रभु वासुपूज्य भजलै प्राणी॥
लय : नित जाप जपो श्री नवकारं