Shital Prabhu Stwan (Surat Thari Man Base)

यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.

10शीतल प्रभु स्तवन

सूरत थांरी मन बसै साहिब जी।1. शीतल जिन शिवदायका साहिब जी। शीतल चन्द समान हो, निसनेही। 
शीतल अमृत सारिषा साहिब जी। तप्त मिटै तुम ध्यान हो, निसनेही॥

2. वंदै निंदै तो भणी साहिब जी ! राग द्वेष नहीं ताम हो, निसनेही। 
मोह-दावानल मेटियो साहिब जी ! गुण-निप्पन तुम नाम हो, निसनेही ॥
3. नृत्य करै तुझ आगलै साहिब जी ! इंद्राणी सुर-नार हो, निसनेही। 
राग भाव नहिं ऊपजै साहिब जी ! अंतर तप्त निवार हो, निसनेही॥1
4. क्रोध मान माया लोभ ए साहिब जी ! अग्नि सूं अधिकी आग हो, निसनेही। 
शुकल ध्यान रूप जल करी साहिब जी! थया शीतलीभूत महाभाग हो, निसनेही॥
5. इन्द्रिय नोइन्द्रिय आकरा साहिब जी ! दुर्जय नैं दुर्दान्त हो, निसनेही। तें जीत्या मन थिर करी साहिब जी। घर उपशम चित शांत हो, निसनेही ॥
6. अंतरजामी ! आपरो साहिब जी ! ध्यान धरूं दिन-रैन हो, निसनेही। उवाही दशा कद आवसी साहिब जी ! होसी उत्कृष्टो चैन हो, निसनेही॥
7. उगणीसै पूनम भाद्रवी साहिब जी ! शीतल मिलवा काज हो, निसनेही। शीतल जिनजी नैं समरिया साहिब जी ! हिय शीतल हुवो आज हो, निसनेही ॥
लय : हूं देवा आई ओलंभड़ा सासूजी

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