झिलमिल झिलमिल चुनड़ी मे तारा चमके, आज्या ए भवानी थांरा सेवक तरसे।।
लाल सुरंगी मेंहदी थारै, हथेल्या राचै लाल, धाम है थांरो ओसिया माता मंदिर बण्यो विशाल, सिंह पर बैठ्या माताजी न सेवक निरखे,
आज्या ए भवानी.
हाथां सोव लाल चुड़ो मां, गल बीच नौसर हार, लाल कसुमल कब्जो सोव, लम्पी की बहार, काना मांही झूमका मां, मोती चमकै,
आज्या ए भवान
माथै सोव बोरलो, नेणा काजलिया री रेख, पलकां तो उघाड़ो मैय्या, टाबरियां न देख, कब से खड़या पुकारा, थारा सेवक तरसै,
आज्या ए भवानी.
पग पैजनिया कमर तागड़ी, सिर पर चॅवर ढुंले, जगमग थांरी ज्योत जगे मां, छप्पन भोग लगे, देख देख थांरो रूप सुहाणो, मनड़ो हरषै,
आज्या ए भवानी.
लाल ध्वजा फहर मंदिर पर नौबत बाजै द्वार, रजत सिंहासन बैठी माता, तीन लोक सरकार, थांरा भक्त करें गुणगान, गगन से अमृत बरसै
आज्या ए भवानी..