भारत माता की जय – २
चन्दन है इस देश की माटी तपो भूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की मूरत बच्चा बच्चा राम है
हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है
जहाँ सिंह बन गए खिलोने गाय जहाँ माँ प्यारी है
जहाँ सवेरा शंख बजाता, लोरी गाती शाम है
हर बाला देवी की मूरत
जहाँ कर्म से भाग्य बदलता, श्रम निष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथाएँ गाति कवि की वाणी है
ज्ञान जहाँ का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है
हर बाला देवी की मूरत
इस के सैनिक जन्मभूमि में गाया करते गीता है
जहाँ खेल में हल के नीचे खेला करती सीता है
जीवन का आदर्श यहाँ पर परमेश्वर का धाम है
हर बाला देवी की मूरत………..