कदम-कदम बढ़ाए जा, ख़ुशी के गीत गाये जा
ये ज़िन्दगी है कौम की, तू कौम पे लुटाये जा
तेरे लिए तेरे वतन की खाक बेक़रार है
हिमालय की चोटियों को तेरा इंतज़ार है
वतन से दूर है मगर, वतन के गीत गाये जा
ये ज़िन्दगी है कौम की….
बड़ा कठिन सफ़र है ये, बड़े कठिन हैं रास्ते मगर ये मुश्किलें हैं क्या, सिपाहियों के वास्ते तू बिजलियों से खेल, आँधियों पे मुस्कुराये जा ये ज़िन्दगी है कौम की….
बिछड़ रहा है तुझसे तेरा, भाई तो बिछड़ने दे
नसीब कौम का बने, तो अपना घर उजड़ने दे
मिटा के अपना एक घर, हज़ार घर बसाये जा
ये ज़िन्दगी है कौम की….
देशभक्ति गीत