(तर्ज -वृंदावनका कृष्ण कन्हैया )
तेरापंथ का ओ सांवरिया जनजीवन का रखवारा
मर्यादा पुरुषोतम भिक्षु जग की नैया खेवन हारा
युग का नेता ,युगका वेता ,युगका सर्जनहारारे।
युग पर छाप आपकी रखकर तू सुरधाम सिधारारे
जग ‘तेरा इतिहास गा रहा तूने कैसा जादू डारा रै
तेरा संयम तेरी दृढ़ता जगमग जीवन तेरा रे
वही रचना तेरी युक्ति तेरा ज्ञान उजारा रे
बना विश्व आदर्श आजतो,भक्तो का प्राण पियारा रे
तेरी मर्यादाओ ने शासन मजबूत बनाया रे,
इस पर चलने वालो ने मानव मन को चमकाया रे
इनसे ऊबे पड़े कष्ट में, डूबे भव जल धारा रै
जिसने तेरा शासन पाया उसने सब सबकुछ पाया रे
ध्याना पड़े ना किसी और को जिसने तुमको ध्याया रै
तुलसी तेरा ही अनुयाई सोहन के मन भाया रे