“Dharu Charan Kamal Ka Dhyan

(तर्ज : जय जय जगदम्बे)

धंरू चरण कमल का ध्यान, देवो वरदान मोहे शिवरानी, जय जय जगदम्बे भवानी ।।
मस्तक पे मुकुट करता चमचम, पैरों में पायल की रुणझुण, है कोटि सुर्य का तेज चमक रही शानी, जय जय……. ।। 1 ।।
तूं नव दुर्गा तारा काली, दुष्टों का दमन करने वाली, भक्तों की ईच्छा पूर्ण कर मन मानी, जय जय 11 2 11
है कर में खड़ग खप्पर भाला, शोभित सवारी सिंह मतवाला, विष्णु महेश वन भैरव है अगवानी, जय जय 11 3 11
विधी से पूजन करते चित से, भक्तन भण्डार भरो वित्त से अब महर करो जग जननी मन में ठानी, जय जय 11 4 ||
जग में अदभुत तेरी माया, वेदों ने पार नहीं पाया, थक गये खोजते बड़े ऋषी मुनि ज्ञानी, जय जय
सच्चियाय माँ मंडल का कहना, भगवती भरोसे सब रहना, गावै बद्री, बिक्शा, जीवन, व्यास, रत्ताणी, जय जय

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