खुशी हम आज मनाते हैं
(तर्ज :आज मेरे यार की शादी है)
खुशी हम आज मनाते हैं, आज मनाते हैं, मधुर संगीत सुनाते हैं ।। ध्रुव ।।
स्वर्ण रवि आज उदित है – ओ हो,
कि जन-जन आज मुदित है – आ हा…
मधुर संगीत मुखर है,
प्रणत अक्षर-अक्षर है हो…
आदिश्वर के चरणों में हम शीष झुकाते हैं ।। १ ।।
वो युग था असि, मासि, कृषि का – ओ हो,
नहीं आतंक किसी का-आ हा,
ऋषभ ने पथ दिखलाया, ज्ञान, विज्ञान सिखाया हो… राजा प्रथम, प्रथम युग कर्ता, आगम गाते हैं ।।२।।
साधना पथ अपनाकर – ओ हो,
घूमते बाबा घर-घर-आ हा,
वस्त्र आभूषण देते, अश्व, गज, नौकर देते हो…
नहीं बोलते, नहीं कुछ लेते, चलते जाते हैं ।। ३ ।।
रात्री में स्वप्न अनोखा- ओ हो,
सुबह में खोल झरोखा – आ हा,
देखता बाबा आये, श्रेयांष फिर दोड़ा जाये – हो… ले आया महलो में, इक्षु रस बहराते हैं ।।४।।
पांच दिव्यों की बरसा – ओ हो,
देख जन-जन मन हरसा – आ हा,
प्रथम याचक प्रथम दाता, देख सूर-नर हरसाता हो…
एक वर्ष का भीषण तप भगवान कराते हैं । । ५ ।।