Guru Tulsi Ke Avdano Ko Milkar Yad Karte Hai

यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.

* सौसो सुरज तप तपै चंदा उगै हजार।

 इतना चानण होत भी गुरुबिन घोर अंधार ॥

गुरु, तुलसी के अवदानों को मिलकर याद करते है
 तुम्हारी अर्चना में हम समर्पण भाव भरते हैं 
हुआ घूंघट से माइक तक सफर संभव तेरे कारण 
करो स्वीकार गुरूवर जी नमन शतबार करते हैं।

तर्ज (Tune): देखा एक ख्वाब

भजन के बोल / Lyrics

– युग चिन्तक, युग प्रहरी, युग के उजारे
 महिला अधिकारों के तुम रखवारे ॥ 
आया शताब्दी वर्ष करते नमन्
 तुलसी 2 गाये चाँद सितारे ॥ 
लाडनूं की धरती  को जगमग किया 
माँ वदना ने हीरा संघ को दिया 
गुरूवर कालू के बन गये दुलारे, 
मुनिका व्यवस्था के काम सुधारो
 २२ वर्ष के गणधार भी बने।
नूतन सृजन कंटीले रास्ते चुने
 अणुव्रत प्रेक्षा और आगम् संपादन 
जीवन विज्ञान व्यवहारों मे उतारे। 
जैन एकता के लिये समर्पित हु‌ये
 विश्व भारती से जले ज्ञान के दीये
 वीर के सन्देशों का व्यापक प्रचार (प्रसार) 
समण श्रेणी ने कितने काम संवारे
महाप्रज्ञ जी विवेकानन्द समान 
नये मोड से नारी जाति का उत्थान
भैक्षव शासन की सौरभ दिग दिगंत 
महाश्रमण जी आज सबके सहारे ॥
कैसे किये इतने काम गुरुवर। 
फैलाया धरती में नाम गुरुवर ।
संघ है आभारी गणाधिपति का
 होके कृतज्ञ तुलसी नाम पुकारे 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top