केलवा के योगी तेरे नाम का सहारा है
नैया मझधारा में है दूर किनारा है
तेरे ही हवाले अब जीवन हमारा है।।
मरूधर की माटी की ये अजब निशानी है
भिक्षु की जीवन गाथा प्रेरक कहानी है।
देश में परतन्त्रता का हो गया प्रवेश था।
शिथिल विचारों से धर्म निस्तेज था?
मारवाड़ी भूमि से वही क्रांति कीधारा है
दीपा जी के लाल जन्मा कुल उजियारा है
हुआ परिणय सुगणी बाई घर आगई
भावना वैराग्य की लेकिन बढ़ती जा रही।
पत्नी का निधन ये संसार लगे खारा है।
रघुनाथ जी ने आके माता को पुकारा है।
सिंह को सपन अब (होगा)फलित तुम्हारा है।
प्रखर प्रतिभा देख पुलकित गुरु मन
ज्ञान ध्यान तप देख गर्वित जन जन (हर्षित )
राजनगर के श्रावकों ने समय पे जगा दिया
बिगुल शिथिलता के विरुद्ध बजा दिया
स्वीकारा भिक्षु ने किया गुरु को इशारा है,
न ही माने गुरु तो संकल्प दृढ़ धाराहै
शिथिला चारी साधुओं से कर लिया किनारा है ।
घोर विरोध पर पथिक मजबूत था,
सच्चाई की राह पे चला को क्रान्ति दूत था
अन्न नहीं पान नहीं मरघट प्रवास था
अंधेरी औरी से फैला धर्म प्रकाश था
तप की कसोटी कस खुद को निखारा है
बोल पड़े दैषी भी अलबेला (अटल) ध्रुव ताराहै (अनोखा)
तेरह की संख्या से तेरापंथ नाम बन गया
स्वामीजी ने सुन वीर प्रभु को नमन किया
एक ही आचार एक आचारज की आण है
ऐक ही विचार और एक ही विधान है।
बीर के शासन में तेरापंथ तारण हारा है
तेरापंथ के त्राताको समर्पण हमारा है।।
इच्छा मृत्यु धारी ज्योति मे उड़ गई आकाश में
सिरियारी अमर हुई है। इतिहास में
ग्यारह ही आचार्य तीर्थंकर समान है
तेरापंथ तीर्थ श्रद्धा का आस्थान है।
कितने सौभागी पाया संघ प्राण प्यारा है
स्वामी जी के आर्शीवचन का नजारा है
सदगुणों की सुरभि से महका जग सारा है