यह जैन तपस्या और अनुमोदना के अवसरों पर गाया जाने वाला आध्यात्मिक गीत है। A spiritual song for Jain Tapasya and Anumodana.
आध्यात्मिक भजन
किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते
हैं पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं
यह दुनियाँ एक उलझन है, कहीं धोखा कहीं ठोकर।
कोई हँस-हँस कर जीता है, कोई जीता है रो-रोकर ॥
जो मुश्किल में ना घबरायें, उसे इन्सान कहते हैं।
अगर गलती रुलाती है, तो राहें भी दिखाती है।
मनुज गलती का पुतला है, तो अक्सर हो ही जाती है।
जो कर ले ठीक गलती को, उसे इन्सान कहते हैं।
यों भरने को तो दुनियाँ में, पशु भी पेट भरते हैं।
लिये इन्सान का दिल जो, वो नर परमार्थ करते हैं॥ पथिक जो बाँट कर खाये, उसे इन्सान कहते हैं।