हमारे भाग्य बड़े बलवान
(लय : बना मन मंदिर आलीशान)
हमारे भाग्य बडे बलवान, मिला यह तेरापंथ महान।
करने जीवन का कल्याण, मिला यह तेरापंथ महान ॥
१. भिक्ष ने ढूंढ निकाला, कैसा अमृतमय प्याला।
आला धार्मिक जग की शान
२. जो व्यापक बनने आया, है वर्गातीत कहाया।
पाया अपना ऊँचा स्थान
३. विद्या विकास है जारी, भावुक मुनि सतियां सारी। भारी है चरित्र प्रधान ॥
४. मौलिकता रहे सुरक्षित परिवर्तन सदा अपेक्षित। लक्षित निज-पर का उत्थान ॥
५. गुरु-आज्ञा जहां बड़ी है, बन पहरेदार खड़ी है।
आज्ञा बिना हिले क्यों पान ॥
६. भिक्षु-स्वामी की कृति यह, भिक्षु स्वामी की धृति यह। सारा भिक्षु का सुविधान ॥
७. जिसका इसमें एकीपन, उसका ही है यह शासन। उसका इससे है सम्मान ॥
८. लो जन-जन का अभिनन्दन, गण सदा रहे वन नन्दन। ‘वदना-नन्दन’ का आह्वान ॥
९. भिक्षु-स्मृति दिन है आया, मिल संग अभंग मनाया। खिला’सरदार शहर’सुस्थान ॥