Varshitap Ki Mahima Ko Gaye

(लय-फिरकी वाली तू)

वर्षीतप की महिमा को गाये, खुद तपमय बन जायें, 
तप साधना का द्वार हैं तप से पल-पल घटता आत्मा का भार है।
वर्षीतप की महिमा को गाये –
1. आत्मशुद्धि का सच्चा साथी मन का मैल मिटाता है, तप में तप कर स्वर्ण स्वयं की आभा को बतलाता है, 
तप प्रकाश है-2 तब मिठास है, तपं अमृत का प्याला, पीने वाला, पा तप का स्वाद निराला, बनकर तप में मतवाला, पाता तप का अधिकार है, तप से पल-पल घटता आत्मा का भार है।।
वर्षी तप की महिमा को गायें—-
2. इच्छाओं के आमंत्रण को, जो पल-पल ठुकराता है, वर्षीतप की श्रेणी में वह, उर्ध्व गमन कर पाता है, तन का मन का-2 तन मन का निरोध हो जाता, मीठे वचन सुनाता प्यारी-प्यारी समता की भोर सुहानी, संयम की सहज निशानी, यह त्याग का विस्तार है, तप से पल-पल घटता आत्मा का भार है।।
वर्षीतप की महिमा को गाये —

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