Balihaari Ho Shanti Jinand Ki 16(chobisi jayachary)

16

शान्ति प्रभु स्तवन
बलिहारी हो शांति जिणंद की।
1. शांति करण प्रभु शांतिनाथजी, शिवदायक सुखकंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की॥
2. अमृत-वाण सुधा-सी अनुपम, मेटण मिथ्या मंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की ॥
3. काम भोग राग द्वेष कटुक फल, विष-बेली मोह-धंघ की। बलिहारी हो शांति जिणंद की ॥
4. राखसणी रमणी वैतरणी, पुतली अशुचि दुर्गन्ध की। बलिहारी हो शांति जिणंद की ॥
5. विविध उपदेश देई जन ताऱ्या, हूं वारि जाऊं विश्वनंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की ॥
6. परम दयाल गोवाल कृपानिधि, तुम जप माला आनंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की।
7. संवत उगणीसै आसू बिद एकम, शांति-लता सुखकंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की।
(लय : हूं बलिहारी भीखणजी साध री)

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