Balihaari Ho Shanti Jinand Ki

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शान्ति प्रभु स्तवन
बलिहारी हो शांति जिणंद की।
1. शांति करण प्रभु शांतिनाथजी, शिवदायक सुखकंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की॥
2. अमृत-वाण सुधा-सी अनुपम, मेटण मिथ्या मंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की ॥
3. काम भोग राग द्वेष कटुक फल, विष-बेली मोह-धंघ की। बलिहारी हो शांति जिणंद की ॥
4. राखसणी रमणी वैतरणी, पुतली अशुचि दुर्गन्ध की। बलिहारी हो शांति जिणंद की ॥
5. विविध उपदेश देई जन ताऱ्या, हूं वारि जाऊं विश्वनंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की ॥
6. परम दयाल गोवाल कृपानिधि, तुम जप माला आनंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की।
7. संवत उगणीसै आसू बिद एकम, शांति-लता सुखकंद की। बलिहारी हो शांति जिणंद की।
लय : हूं बलिहारी भीखणजी साध री

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