श्री रामदेव आराधना
(तर्ज – आ तो सरवरिये रे तीर…)
लीले घोड़े रा असवार, करां धांरी मनवार,
बाबा म्हारे घरां आओ जी, आओ जी……।।
कानां में थांरे कुण्डल सोहे, गल बैजन्ती माला,
सिर पे थांरे मुकुट बिराजे, नैण लगे मतवाला,
शोभा बरणी नहीं जाय, देख्यां मन हरषाय ।।
पीरां का थे पीर कहाओ, अजमल घर अवतारी,
महिमा थांरी बरणी न जाये, पूजे दुनियां सारी,
म्हें भी धरां थांरो ध्यान, गांवा थांरा ही गुणगान ।।
आंधा न थे आंख्या देवो, पांगलिया नै पांव,
कोढया की थे कोढ मिटाओ, जाणे सकल जहान, “मूलचन्द” अर्जी करे हमेश, हरज्यो सारा कष्ट कलेश ।।