Shree Bhikshu Swami Ro Prabal Pratap Hai

(लयः आने वाले कल की तुम )

रचयिता : युवाचार्यश्री महाश्रमणजी

भिक्षु-स्मरण
श्री भिक्षु स्वामी रो परम प्रताप है। 
श्रद्धा-विधियुत नाम समरतां, मिटै बहुल संताप है।।
१. मिलै नहीं जद अन्य सहारो, महापुरुषां नै याद करां, दुःख भय री स्थितियां में, आस्थासिक्त स्वरां स्यूं नाद करां जन-जन रोज जपै जयकारी जाप है ।।
२. सत्य, साम्य रा सजग पुजारी, महावीर प्रभु-प्रतिनिधि हा, आगम पर गहरी आस्था, गंभीर ज्ञान रा जलनिधि हा 
संघ-हृदय में गुरु भीखण री छाप है ।।
३. प्रायः पांच बरस लग, नहीं मिल्यो पूरो भोजन-पाणी, शान्त भाव स्यूं साफ सुणाता, जनता नै भगवद् वाणी ।
शुद्ध भावना दूर करै सब पाप है ।।
४. सिरियारी प्यारी नगरी में, अन्तिम श्वास लियो स्वामी, क्षण-क्षण आत्म-निरीक्षण कर-कर, बणां सभीअन्तर्यामी 
आस्था बल स्यूं हटै सहज अभिशाप है ।।

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