घोड़ी (लय- म्हारे हिवडे में नाचे मोर)
म्हारे बने की घोड़ी नाचे तक थैया थैया
बनडो़ ले जावै बारात ससुराल की गलिया
घोड़ी चाले घूमर घालै नाचें नाच नचैया
पहलो पग घोड़ी जद मेल्यो दादीसा दौड़या आया
खरी जरी री अचकन म्हारे बन्ने खातिर लाया
अचकन पराकर दादोसा सजावै दादीसा लेवै बलैया
दूजो पग घोड़ी जद मेल्यो पापाजी दौडया आवै
केसरिया सो सुरंगों साफो बन्ने खातिर लाया
साफो बांधकर पापाजी सजावै मम्मी लेवे बलैया
अगलो पग घोडी जब मेल्यों काकोसा दौडया आवै
सोने की इक मोर किलंगी बन्ने खातिर ल्याया
किलंगी लगाकर काकोसा सजावै काकीसा लेवै बलैया
चौथो पग घोडी जद मेल्यो नानीसा दौड्या आवै
हीरा पन्ना री इक दुलडी बन्ने खातिर ल्याया
दुल्लडी पैराकर नानोसा सजावे नानीसा लेने बलैया
पांचवो पग घोड़ी जद मेल्यो फूंफोसा दौड़या आवै
चांदी री कटार घड़ाकर बनड़े खातिर लाया
कटार लगाकर फुफोसा सजावे भूआसा लेवे बलैया
(बना- २ लय मै तो रास्ते से जा रहा था)
सिटी काहे को बजाई, मै तो जा रही थी
मैं तो तेरे लिए हलवा बना रही थी
तेरी सीटी की आवाज मेरे किचन में आई
मैं तो तेरे लिए Make up लगा रही थी
तेरी सीटी की आवाज मेरे Drawing room मे मेआई
तेरी सीटी की की आवाज मेरे Bathroom मे आई मैं तो तेरे लिए मल मल नहा रही थी
तेरी सीटी की आवाज आवाज मेरे Bedroom में आई १) मै तो तेरे लिए सेज सजा रही थी