(तर्ज- मैया यशोदा तेरा कन्हैया)
जिन शासन है पाया, भिक्षु का साया
तुलसी गणी की शीतल है छाया
महाश्रमण चरणों में शीष झुकाएं हम
स्वागतम् स्वागतम् सुस्वागतम्
① स्वागत की घड़ियां लगती सुहानी
मन का मयूर नाचे भोर लुभानी
मंगल भावों के स्वास्तिक रचाएं
कुमकुम केसर का तिलक लगाए
अध्यात्म मोली २ के धागे सजा के
श्रद्धा समर्पण के दीप जलाके
खुशियों से मंगल गीत उच्चारे हम
स्वागतम् स्वागतम् सुस्वागतम्
उतरे व्यवहार में जब धरम हमारे
तब ही तो लगती है नांव किनारे
बिन धर्म के कोई जीवन नहीं है
देवगुरु की वाणी यही हैं
धर्म ही सच्चा-२ तारणतरण है
अरिहन्त सिद्ध साथ सबकी शरण है
मानव जीवन को सफल बनाए हम
स्वागतम् स्वागतम् सुस्वागतम्