गौतम गणधर बड़े महान
(लय : रघुपति राघव राजाराम)
रचयिता : साध्वी राजीमतीजी
गौतम गणधर बड़े महान, रिद्धि-सिद्धि का देते दान। जिनके जप से नवों निधान, मिलता सच्चा आत्मिक ज्ञान।। ध्रुव।।
1. महावीर के शिष्य बड़े, करते घन्टों ध्यान खड़े।
बिना सहारे शिखर चढ़े, बन गये ज्ञानी बिना पढ़ें ।।
2. गौतम जप से मिटते रोग, टलते भूत-प्रेत के योग। मन-वांछित सब मिलते भोग, कटते दुष्ट कर्म-संयोग ।।
3. पृथ्वी मां वसुभूति विलास, वर्ष पचास रहे गृहवास। तीस वर्ष तक प्रभु के पास, द्वादश केवल ज्ञान प्रकाश ।।
4. थी अक्षीणलब्धि विख्यात, गौतम के कर में साक्षात। नहीं खूटते धृत मधुभात, जो जपता गौतम को प्रात।।