|| अब तो पधारो भगवन ॥
तर्ज : डस गये कालो नाग रे..
अब तो पधारो भगवन, प्राणा री प्यास है.
जल्दी बताओ म्हानै, कठै थांरो वास है ॥ टेर ॥
1. सुख में सहारो भिक्षु दुःख में सहारो,
संकट मोचन हारो, नाम तिहारो,
परचा मिले है, जिणने पूरो विश्वास है ॥१ ॥
2. रूँ रूँ में बोले भिक्षु कण कण में भिक्षु,
सोवत जागत भिक्षु खिण खिण में भिक्षु,
मंदिर में आवो अब तो दिये में उजास है ॥२ ॥
3. कष्ट तो घणा हा सह्या के के बताबाँ,
हंसता हलाहल पीग्या हिम्मत सरावा,
शूला री नौका उपर वीरा रो निवास है ॥३ ॥
4. रोट्या पड़ी ही कठे, धोवण सारो खूटग्यो,
जाग्यां देवण ने मानो, जग सारो रुठग्यो,
बगड़ी री छत्रयां माही, पहलो निवास है ॥४॥
5. नियम बणाकर जबरां, नींव जमाई,
लाखां री डूबत नैया, पार लगाई
थांरो बलिदान बणग्यो, गण इतिहास है ॥५ ॥