यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
मन से पुकारूं भिक्षु…
तर्ज (Tune): तुम्हीं मेरे मंदिर…
भजन के बोल / Lyrics
मन से पुकारूं, वचन से पुकारूं, कहां पे मिलोगे (भिक्षु), कहां पे मिलोगे। दिन में न भूलूं, रात में न भूलूं,
सुधि कब लोगे (भिक्षु), सुधि कब लोगे ।। आं।।
ढूंढ़ रही हूं तेरी, कब से नगरिया।
तुमसे मिलूं मैं कैसे, बता दो डगरिया।
सुनो टेर मेरी, कर दो इशारा ।।१।।
जूठे हैं फूल सारे, हार क्या सजाऊं।
प्राण देव के चरणों में, प्राण ये चढाऊं ।
तुम्हीं हो सहारे, तुम्हीं से उजारा ।।२।।
भक्तपुरी सिरियारी, भक्तों का धाम है।
गूंजता हृदय में केवल, भिखू स्याम नाम है।
ढूंढ़ रही हूं इस जग का किनारा ।।३।।
आगमों का अमृत देकर, कितनों को तारा।
मिथ्या तम के चंगुल से तुमने उबारा।
यक्षराज जागे तेरा, पाकर सहारा ।।४।।
तुम हो कन्हैया मेरे, मैं हूं सुदामा ।
शबरी बनूं मैं मेरे, तुम ही हो रामा ।
“सोमलता” को भिक्षु, दिखा दो नजारा ।।५।।