Ikshu Ras Ka Kiya Parna

पारणा (आखातीज)

(तर्ज : देख तेरे संसार की)
इक्षुरस का किया पारणा आखातीज महान, जय जय आदीनाथ भगवान।
श्रेयांस कुबेर ने दिया भावसे आज सुपात्र दान, जय जय आदीनाथ भगवान।
ऐसा करम उदय में आया, बारह मास तक आहार न पाया।
सुखी कल्पवृक्ष सी काया, फिर भी दिल में नहीं घबराया।
घर घर में नित जावे, गोचरी, देते सब सम्मान ।।१।।
जय जय आदीनाथ भगवान।
कोई हाथी घोड़ा ल्यावै, रत्न थाल कोई बहरावै।
कोई कन्या भेंट चढावै, प्रभु देख पाछा फिर जावै। बारह घड़ी अंतराय की दिन्ही, बारह मास भुगतान ।।२।।
जय जय आदीनाथ भगवान।
विचरत विचरत महलों में आये, भोज दोष रहित नहीं पाये। 
प्रभु लोटकर बाहर आए, श्रेयांस कहें हैं मुनिराये। इक्षु रस निर्दोष है स्वामी, यहीं लो कृपा निघान ।।३।।
जय जय आदीनाथ भगवान।
आज प्रभु ने पात्र बढ़ाया कुंबर शेरड़ी रस बहराया।
किया पारणा सब मन भाया, तीन लोक में आनंद छाया। घर-घर हर्ष सवाया गाया, सुर नर मंगल गान ।।४।।
जय जय आदीनाथ भगवान।
आज भी जो वर्षीतप करते, इसी दिन पर पारणा करते। आरंभ और कषाय करते, सच्चा फल तप का वो भरते। कर्म काटने को है तत्पर, तपसी सुभागी महान ।।५।।
जय जय आदीनाथ भगवान।

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