(लय- मेरा रंग दे बसंती चोला)
कोई वीर ये पथ अपनाए ३
भक्ति मार्ग पर वोही आता जिसके उत्तम कर्म है।
निकट भवि ही धारण करते और निभाते धर्म है
जिसके उत्तम भाव सदा ही वही संत बन पाए,
हर एक बूंद न बनता मोती, पड़ करके इस सीप में
हर परवाना जल नहीं सकता आकर के इस दीपमे
जान लड़ा कोई हिम्मत वाला सर्प मणि को पाए
सयंम पथ पर चलने वाले अनुयायी महावीर के
महावीर की तरह ही बढ़ते बाधाओं को चीर के
स्वयं सफलता उनके सम्मुख आकर शिश झुकाए