Diksha

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Jain Shraman Ki Diksha Lene Vairagi Taiyar

(लय- सावन का महीना) जैन श्रमण की दीक्षा लेने वैरागी तैयार ।  संयम के जीवन पर चलना है खांडे की धार ।।  कदम-दर-कदम सावधान बन चलना हे।,  पल-३ ज्योतिर्मय दीपक बन जलना है  समयं गोयम मा पमायए मंत्र बने साकार   सरलनही है संयम  पालन करना  महानदी गंगा को बाहो में तरना  निरति चार आचार […]

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Sanyam Ke Path Par

(लय- जहां डाल-डाल पर सोने) संयम के के पथ पर दृढ़ कर जीवन को सफल बनाना जिनशासन की शान बढ़ाना तन मन अर्पण कर चरणन में जीवन ज्योति जगाना  जिन शासन शान बढ़ाना  आयेगें कष्ट अनेको ही पथ से ना विचलितं होना  हो ज्ञान ध्यान में लीन सदा क्षण भर भी व्यर्थ न खोना आंधी

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Koi Veer Ye Path Apnaye

 (लय- मेरा रंग दे बसंती चोला) कोई वीर ये पथ अपनाए ३  भक्ति मार्ग पर वोही आता जिसके उत्तम कर्म है।  निकट भवि ही धारण करते और निभाते धर्म है  जिसके उत्तम भाव सदा ही वही संत बन पाए,  हर एक बूंद न बनता मोती, पड़ करके इस सीप में  हर परवाना जल नहीं सकता

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Bihad Path Par Chalana Nahi Asan Hai

(लय- खड़ी नीम के नीचे मैं तो एक ली) बीहड़ पंथ पर चलना नहीं आसान है  जलते अंगारो को कर में लेना काम महान हैं  नंगे पैरो वसुंधरा  पर बहुत कठिन ही चलना है।  पंच महाव्रत स्वर्ण शिखर को निज कंधो पर धरना हें संयम लेना जीवन का बलिदान है  चंचल मनकी चंचलता को करना

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Karalyo Karalyo Ab Aatma N Ujwal Karalyo Ho

(लय-तेजा) करल्यो करल्यो करल्यो अब आत्मा उज्वल करल्यो हो साथ मिल्यो है गुरुराज रो  देवगुरु और धर्म सहारे नैया पार लगाज्यों हो  शरणो है साचो जिन धर्म रो ……..पड़‌पोतो,  …………कुल दीप हो, कोख सवाई ….मातरी ,गुरुवर र परताप स्यु गढयो नयो इतिहास हो ,नाम लिखावो तेरापंथ  में महाश्रमण सा गुरुवर पाया साचो तेरापंथ हो,   दीक्षा

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Diksha Par Gey Muktak

दीक्षा पर गेय मुक्तक  1 संसार में माना गया र्दुलभ ये नर का तन ।  लेकिन भटकता भोग और विलास में ये मन ।। सौभाग्य से हमें मिला महा वीर का शासन  जो बोलता है आज भी ,संयम  ही है जीवन  ।। 2 दीक्षा का अर्थ है, आध्यात्मिक शरण ।  संयम का मार्ग है सचमुच

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