घर की सब चहल पहल है बेटी ।
जीवन में खिला कमल है बेटी !!
कभी फागुनी धूप सुहानी कभी चाँदशीतल है बैटी
शिक्षा गुण संस्कार रोप दो फिर बेटो सी सबल है बेटी, दो सहारा गर विश्वासका तो पावन गंगाजल है बेटी प्रकृति के सद्गुण को सीचो तो निर्मल निश्चल है बेटी
क्यों डरते पैदा करने से अरे आने वाला कल है बेटी बाबुल माँ, की आन और शान है बेटी
इस धरा पर मालिक का वरदान है बेटी
रिश्तों के कानन में मधुवन सी मुस्कान हँ बेटी
त्याग और स्नेह की मधुर मूरत है.
कण-कण है कोमल अनूप है बेटी
हृदय की लकीरों का सच्चा रूप है बेटी
अनुनय विनय और अनुराग है बेटी
इस वसुधा में रीत और प्रीत का है राग बेटी
माता पिता के मन का वंदन है बेटी
भाई के ललाट का चंदन है बेटी