(लय-रामा-रामा रटते रहते बीती रे उमरिया)
जगमग चमकी देखो म्हारे बाबुल की अटरिया -2
भात भरण म्हारो बीरो आयो ले कर लाल चुनरियां जगमग चमकी—
बरगद को जिस्यो फेल्यो म्हारो बाबुलको परिवार है
भाई भतीजा भावजा स्यू आंगण में उजियार है
मान घणो म्हार बाबुल को जाण गई नगरिया
जगमग चमकी देखो म्हारे बाबुल कीअटरिया
भात भरण म्हारो वीरो –