Author name: Sunita Dugar

Gajanan, Ganesh Ji, Vinayak

Mhar Banade Ko Byav Mandyo

(तर्ज – नखरालो देवरीयो …) म्हार बनड़ रो ब्याह मंड्यो बिनायक आओजी  घर कानै चाव चढ्यो विनायक आओ जी ।  म्हार बनड़ … १) पैली पत्रीका भेजी थाने रिद्धी सिद्ध साग ल्याओ  द्वार खड्या थांरी बाट उडींकां रणक भवर स्यूं आज्यो मतना थे देर करो विनायक आओजी ।  म्हारे घर में ब्याह रच्यो २) बाबुजी […]

Gajanan, Ganesh Ji, Ganpati, Vinayak

Vinayak Mhare Aangane Birajo Ji

(तर्ज : बाइसारा बिरा जयपुर …) बिनायक म्हार आंगणे बिराजो जी ब्याव रो सारो थे कारज सारो जी। (१) ऊंचो तो थान आसन देवां जी, सगला स्यूं पेली म्हे थान मनावां जी… (२) रिद्धि सिद्धि र साग बेगा पधारो जी, रोली और मोली स्यूं म्हे थान मनावांजी (३) फूलां स्यूं थारी झांकी सजावां जी लाडू

Gajanan, Ganesh Ji, Vinayak

Chalo Vinayak

*** चालो विनायक आपां जोशी जी र चाला,  चोखा चोखा लगन लिखांवा ओ राज म्हारो बिरद विनायक  सूंड सूंडालो बाबो दूंद दूंदालो, ओछी सी पींडी कामण गारो ओ राज  चालो विनायक आपां सोनीजी र चालां, चोखा चोखा गजरा घडावां ओ राज म्हारो विरद विनायक  चालो विनायक आंपा मोदी जी र चाला, चोखी चोखी चुनड़ी रंगावा

Gajanan, Ganesh Ji, Vinayak

Aavo Gajanan Baitho Gajanan

गणेश बन्दना (तर्ज : खडी नीम के नीचे में तो एकली) आवो गजानन्द बैठो गजानन्द छाँव मे २ कारज सिद्ध करो गणदेवा म्हारा  बने रे ब्याह में, नवल बने रे ब्याह में । आवो गजानन्द सबसे पहले बनडे रा माताजी गजानन्द ने ध्यावे है – २ सोने रुप की बगली में फूलो री साज सजावे

Gajanan, Ganesh Ji, Vinayak

Mangal Avasr (Ganesh Ji Geet)

(तर्ज – फूल तुम्हे भेजा है खत मे …) मंगल अवसर ब्याह रच्या है, गौरी गणेश मनाओरी  प्यारे बना का ब्याह रचा है देवी देव पूजाओरी ।  मंगल अवसर  १) शुभ विवाह की मंगल बेला, जीवन में मंगल कर दे नव जीवन के शुभ आरंभ में, मधुरता सुन्दरता भरदे रहे पुष्पमय जीवन सारा, सिद्ध सिद्ध

Gajanan, Ganesh Ji, Ganpati, Vinayak

Vinayak Geet- 2,3

गजानन जी का गीत -२ आज गजानन्द दादाजी र नूत्यो,  आज गजानन्द बाबाजी र नृत्यो तो दादीजी नूत जीमायो गजानन्द,  सोन र छाज नौबत बाज, तो बड़ीयाजी नूत जीमायो गजानन्द  सोन र छाज नौबत बाज । नौबत बाज नगारा जी बाज तो बाजरया जंगी ढोल गजानन्द  सोन र छाज (इसी तरह पापा, काका, बिरा, मामा,

Gajanan, Ganesh Ji, Vinayak

Bada Aur Chota Vinayak

बडो बिनायक गढ़ रणत भंवर स्यूं आवो बिनायक, करोनी अणचीती बिरदडया। एक बिरद बिनायक दोन्यूं जी आया, आय उतरीया हरीया बाग मं । एक पूछत नगर ढंढोर्यो, सायन मानीजता रो घर किस्यो । एक ऊंचीसी मेड़ी लाल किंवाड़ी, केलज भरक राजीड़ा र बारण । एक पेलो तों बासो सरवर बसीयो, सरवर भरीयो ठण्ड नीर स्यूं

Mahapragya

Shanti Ka Sandesh

शांति का संदेश देखने का कोण बदलें। सोचने का कोण बदलें,  शांत हो आवेश। हिंसा का कारण है रोटी और गरीबी उसकी चोटी  पर भूखा हिंसा करता जब शांत नहीं आवेश ।।१ ।। जटिल परिस्थिति जब-जब आती तब-तब हिंसा भी बढ़ जाती ,स्थिति कैसे बदलेगी जब तक शांत नहीं आवेश ।। २ ।। कभी क्रोध

Terapanth

Arhat Vandana (Bhavbhini Vandana)

वन्दना – सूत्र मोक्ष-सूत्र अर्हत् वन्दना १. णमो अरहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं एसो पंच णमुक्कारो, सव्व पावपणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं ॥ २. जे य बुद्धा अइक्कंता, जे य बुद्धा अणागया। संती तेसिं पइट्ठाणं, भूयाणं जगई जहा ॥ ३. से सुयं चमे, अज्झत्थियं च मे, बंध-पमोक्खो तुज्झअज्झत्थेव

Terapanth

Vandana Ananad Pulkit (Parmeshthi Vandana)

परमेष्ठी वन्दना वन्दना आनन्द-पुलकित, विनयनत हो मैं करूं ।  एक लय हो एक रस हो, भाव तन्मयता वरूं ॥ णमो अरहंताणं सहज निज आलोक से भाषित स्वयं सम्बुद्ध हैं,  धर्म, तीर्थंकर शुभंकर वीतरागविशुद्ध हैं।  गति-प्रतिष्ठा त्राणदाता, आवरण से मुक्त हैं,  देव अर्हन् दिव्य योगज अतिशयों से युक्त हैं ॥१ ॥ णमो सिद्धाणं बन्धनों की श्रृंखला

Scroll to Top