Author name: Sunita Dugar

Mahapragya

Mahapragya Tera Gun Gan Karu

(लय–आ चलके तुझे  मैं लेके चलू ) महाप्रज्ञ तेरा गुणगान करू मन की ये आश फले  पर शब्द नहीं क्या गीत लिखु, मन श्रद्धा दीप जले  ① आगम के सक्षमज्ञाता हो जैन जगत के सूरज  अहिसा के पदचिन्हो पर शान्ति का सवेरा जागै अणुव्रत प्रेक्षा घर-2 पहुंचे, जन-2 की प्यास बने ② प्रभु वीतरागता तेरी […]

Tulsi

Kaisi Vaha Komal Kaya Re (Mahapran Gurudev)

महाप्राण गुरुदेव कैसी वह कोमल काया रे, पुष्पों ने शीश झुकाया रे, कंचन सी कोमल काया रे, महाप्राण महाप्राण महाप्राण गुरुदेव । गुरुदेव । गुरुदेव ।। १. कानों की छटा निराली, आंखें इमरत की किसने सौंदर्य सझाया रे, महाप्राण प्याली । गुरुदेव ।। २. माधुर्य कंठ में घोला, ममता को किसने तोला । वात्सल्य मूर्त

Mahapragya

Karte Vandan

महाप्रज्ञ अर्चना लय : मिलो न तुम तो करते वन्दन हम अभिनन्दन, बालु सुत महाप्रज्ञ।  भाव से वन्दना है, भक्ति से अर्चना है। १. लाखों की पाई तुमने, एक पलक में श्रद्धा भावना, ऐसी अनोखी विभुता, अमर रहे यह सबकी कामना। भाग्य सरायें, नहीं भुलाएं, तुलसी का उपकार ॥ २. प्रज्ञा के देवता में, जग

Mahapragya

Jyotipunj

(लय : मेरा जीवन कोरा कागज) ज्योतिपुञ्ज ! महान गुरुवर ! ज्योति हम पाएं। भाग्यशाली भक्तगण भगवान को ध्याएं ॥ १. व्यक्तिगत शुभ साधना व्यक्तित्व का आधार,  सुगुरु पर श्रद्धा समर्पण सिद्धियां साकार,  अज्ञ से बन विज्ञ फिर महाप्रज्ञ कहलाए ॥ ज्योतिपुञ्ज. १२. हृदय है समता सहजता सरलता की खान,  विश्वगुरु के रूप में है

Mahapragya

Mahapragya Janamdin Pyaro

महाप्रज्ञ जन्म दिन प्यारो लय : कठै स्यूं आई सूं……… क्यूं तेरस आज मनावां, क्यूं हर्ष बधावा गावां।  क्यूं झूम झूम गुण गावां, बतलाओ भायां बायां ॥ १. महाप्रज्ञ जन्म दिन प्यारो, तेरस रो तेज सितारो। चमक्यो तेरापंथ तारो, मिल गीत मंगल गावां ॥ २. कुण माता नन्दन जायो, कुण भगिनी लाड लडायो। किण कुल

Mahapragya

Mahapragya Pragya Ke Sagar

(लय : धर्म की लौ जलाएं…) चरणो में शीश झुकाते हैं,  महाप्रज्ञ प्रज्ञा के सागर, गौरव गाते हैं । मां बालू की रत्न कुक्षि को, तुमने धन्य बनाया,  चौरड़िया परिवार का गौरव, तुमने खूब बढ़ाया। होलारामजी देख तनुज को, स्वप्न सजाते हैं ॥ • कालू-गुरु ने दी दीक्षा, तुलसी ने तुम्हें संवारा,  अपनी कुशल शासना

Mahapragya

Har Sans Sans Me

(लय : जहाँ डाल-डाल पर सोने….) हर सांस-सांस में एक नाम है, महाप्रज्ञ प्रभु प्यारा, सौभागी संघ हमारा। योगीश्वर गुरु पाकर के,  आलोकित गण है सारा, सौभागी संघ हमारा। जय गुरुवरम्, जय गुरुवरम्, जय गुरुवरम्, जय गुरुवरम् १. अमित कोष है भरा ज्ञान का, सागर ज्यों लहराए नरभिमान जीवन की गाथा, गीत वासन्ती गाए-२  पग-पग

Guru Bhakti

Jhumar Nema Nandan

(लय : चांदी जैसा रुप है तेरा) झूमर नेमा नन्दलाल के गायें हम गुणगान एकादशामाचार्य चरणमें कोटि-कोटि प्रणाम तुलसी तरासा है यह हीरा चमकदार  महाप्रज्ञ ने सौंपा गणको सक्षम संघ आघार  चारों तीर्थ निहाल हुए है पा अनुपम उपहार  हर चेहरे पर खिलि हुई है एक मधुरिम मुस्कान  एका दशमाचार्य दिनकर सा देदिप्यमान चिरकांत चमकता

Terapanth

Ye Terapanth Hamara

(लय : ईन्सान से ईन्सान को हो) सो सो वरसो से दे रहा जग को उजियारा  ये तेरापंथ हमारा ,यह तेरापंथ हमारा -2 हम भाग्यवंत है यह पंथ हमे प्राणों से प्यारा यह तेरापंथ हमारा यह तेरापंथ हमारा – 2 भिक्षु की गरिमामयी वाणी बोल रही घर घर में वीणा की झंकार सी रस घोल

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