Author name: Sunita Dugar

Mahavir Swami

Jiski Aaj Jarurat Usne

(लय : मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर…) जिसकी आज जरूरत उसने क्यों पहले अवतार लिया ? मंद चांदनी चंदा की क्यों सूरज को उपहार दिया ? जिसकी आज १. तुम आये तब इस धरती ने अपना रूप संवारा था, मनुज-एकता की वाणी से उसको मिला सहारा था,  मानव अपना भाग्य विधाता पौरुष को आभार दिया। जिसकी आज […]

Mahavir Swami

Kabhi Veer Banke

कभी वीर बनके, महावीर बनके लय : कभी दुर्गा बनके… कभी वीर बनके, महावीर बनके, चले आना, दरश मोहे दे जाना-२ ॥ध्रुव॥ १. तुम ऋषभरूप में आना-२, तुम अजितरूप में आना-२, संभवनाथ बनके, अभिनन्दन बनके, चले आना, दरश मोहे दे जाना-२॥ २. तुम सुमति रूप में आना-२, तुम पद्म रूप में आना-२, सुपार्श्व बनके, चन्द्र

Mahavir Swami

Mahavir Ji O Mahavir

महावीरजी ओ महावीर? लय : उमरांव थांरी बोली महावीर ! थांरा दरसण कर सुख पावां म्हारा स्वाम। महावीर ! थारे चरणां में लुल ज्यावां म्हारा स्वाम ॥ महावीरजी ओ महावीर ! १. मां त्रिशला रा लाडला, सिद्धारथ कुल नन्द,  अन्तिम तीर्थंकर बण्या, छायो जग आनन्द ।  महावीर ! थारी महिमा कांई बतलावा म्हारा स्वाम-महावीरजी… २.

Mahavir Swami

Mhare Aangane Aaya Mat Jao Mahavir

(लय : म्हाने रमता न काजन टीकी लाद्यो. (मारवाड़ी) म्हारे आंगण आया, मत जावो महावीर, आंसूड़ा ढलकावे, म्हारी आंखड़ली-२-:  १. चम्पा लुट गयी मैं बिक्योड़ी, पग बन्धन बन्धियोड़ा,  म्हारी कौन सुणेला, दुनिया मांय महावीर ॥ आंसूड़ा… ॥२. मात पिता सब सखियां छूटी छुट्यो सब परिवार,  थे तो दुखिया ने मत, ठुकरावो महावीर ॥आंसूड़ा… ॥३. आप

Mahavir Swami

Charna Thare Shish Namava

-: चरणा म थारै शीश नमावां :- (लय : नित उठ थांरा म्हे गुण गाव………….) चरणां मे थारै शीश नमावां,  पल पल छिण छिण रटन लगावां  घट म च्यानणियो करद्यो, म्हारा त्रिशला नन्दन,  जन्म सार्थक करयो, म्हारा प्यारा भगवन् ॥ समता री थे अलख जगाई, संयम री सरिता लहरायी, थांरी करुणा भायी हो, म्हारा त्रिशला

Mahavir Swami

Samta Ke Deep Jala Gaye Ji

-: तीर्थंकर महावीर :- लय : ओ म्हांरा गुरुदेव समता के दीप जला गये जी, तीर्थंकर महावीर।  संयम के गीत सुना गये जी, तार्थंकर महावीर ॥ १. सब अपने प्यारे भाई, मत खोदो पथ में खाई।  मैत्री का मार्ग बना गये जी, तीर्थंकर महावीर ॥ २. सब फूल एक ही वन के, सब दीप एक

Mahavir Swami

Jaha Har Dil Mahavir Ki Vani

(तर्ज : जहाँ डाल डाल पे सोने की चिड़िया) जहां हर दिल में महावीर की वाणी घर-घर करे बसेरा, जैन धर्म है मेरा,  जहां सत्य, अहिंसा और धर्म किपग पग लगता डेरा,  वो जैन धर्म है मेरा जहाँ जैन मुनि तपवन में, जाकर तेरा ध्यान लगाया  तुमने उनको दी ज्ञान की ज्योति, जीवन बोध कराया।

Mahavir Swami

Mahavir Charan Me Hum

(लय : होठों से छूलो तुम…………..) महावीर चरण में हम, सब शीष झुकाते हैं।  पावन श्रद्धा के आज, शुभ दीप जलाते हैं ॥ आं ॥ सिद्धार्थ कुल दीपक, मां त्रिशला के नन्दन २  कुंडलपुर में जनमें, छाई थी नव पुलकन ॥  मंगलमय गीतों के दो बोल सुनाते हैं ॥१ ॥ महावीर चरण में हम………… माता

Mahavir Swami

Karti Vandana So So Bar

( लय : नखरालो देवरियो) करती वन्दन सौ सौ बार आज दुनियां सारी।महावीर प्रभु री म्हें जावां सब बलिहारी ॥आं ॥ झिगमिंग-झिगमिंग करती देव्यां आरती उतारें हो।  देव दुन्दुभि बाजै नभ में धरती देव संवारे हो ॥  पग-पग पर फूलां री लगी है फुलवारी ॥१ ॥ आज उग्यो धरती पर सुरज फैल्यो जग में च्यानणियो।

Mahavir Swami

Mangalkari Nam Prabhu Ka

(लय : नैतिकता की सुरसिता में………..) मंगलकारी नाम प्रभु का, तोड़े भव के बन्धन ।  महावीर को वन्दन ॥ टेक ॥ त्रिशला मां का राजदुलारा, सिद्धारथ कुल प्यारा – २ वर्धमान से महावीर बन, जग में किया उजारा।  कष्टों के कांटो में महका, जिसका जीवन उपवन ॥१ ॥ महावीर को वन्दन…. अभय, अहिंसा, अनेकान्त, अपरिग्रह

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