1.Samvtsari Par 2.Shama Yachna Geet
पर्व संवत्सरी मनाते चलो (तर्ज : जोत से जोत जलाते चलो) पर्व संवत्सरी मनाते चलो, सबको हृदय से खमाते चलो बैर विरोध भुलाकर सभी, सबको गले से लगाते चलो पर्व संवत्सरी मनाते जीवन में है द्वेष घृणा का घोर अन्धेरा छाया मोहमाया की रंगरलियों में जीवन है भटकाया दीप क्षमा का जलाते चलो, पर्व संवत्सरी […]