Author name: Sunita Dugar

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Jain Mantra

Jain Mantra Namskar Mahamantra Vandan  path Samayik Aur Sanvar path with Aalochana Poushadh lene parne ki Vidhi Guru Vandana Loggass path (Arth sahit) Paisnthiya Chhand jap Sadhna Vidhi Aatm Raksha kawach Grah Dosh Shanti Upay Barah bhawna Vrihad Mangalpath(Badi manglik) Kalyan Mandir Stotra (संस्कृत हिन्दी कविता रुप अर्थके साथ/ Mangal bhawna,Aanand Bhawna Shree Brihad Shanti […]

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Paisnthiya Chhand

श्री पैंसठिया छन्द १. श्री नेमीश्वर सम्भव स्वाम,  सुविधि, धर्म, शान्ति अभिराम ।  अनन्त, सुव्रत, नमिनाथ सुजाण,  श्री जिनवर मुझ करो कल्याण ।। २. अजितनाथ, चन्दा प्रभु धीर,  आदीश्वर सुपार्श्व गम्भीर ।  विमलनाथ विमल जग-भाण,  श्री जिनवर मुझ करो कल्याण ।। ३. मल्लिनाथ जिन मंगल रूप,  पंचबीस धनुष् सुन्दर स्वरूप ।  श्री अरनाथ नमूं वर्धमान, 

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Loggass Path (Arth Sahit)

लोगस्स पाठ यह चौबीस तीर्थंकरों की स्तुति है। शासन-सेवक, सभी देव और देवियां इससे प्रसन्न रहते हैं। इसकी पूरी माला फेरने से विशेष लाभ होता है। १. लोगस्स उज्जोयगरे, धम्म तित्थ यरे जिणे।  अरहंते कित्तइस्सं, चउवीसंपी केवली ॥  लोक में उद्योत करने वाले धर्म तीर्थ के कर्ता  जिन अहंतों का मैं कीर्तन करूंगा (वे चौबीस

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Aatm Raksha Kawach

आत्म-रक्षा कवच आत्म-रक्षा कवच द्वारा स्वयं को आरक्षित करने पर बाहरी आघात, यात्रा में आकस्मिक दुर्घटना, शत्रु का प्रहार आदि से स्वयं को सुरक्षित रखा जा सकता है। प्राचीन जैन मंत्र शास्त्र के अनुसार आत्म-रक्षा-कवच बनाने की विधि इस प्रकार है- प्रातः शय्या से उठते ही सर्वप्रथम अपनी दोनों हथेलियों के बीच ॐ ह्रीं की

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Grah Dosh Shanti Upay

ग्रह दोष शान्ति उपाय   तीर्थंकरों के नाम परम मांगलिक है। इनके जाप से शासन सेवक देव (यक्ष)  और देवियां (यक्षी) प्रसन्न  से होते हैं।  संकट निवारण लिए साक्षात् वे उपस्थित भी होते भी हैं प्रतिदिन दिन प्रातः एक आसन में बैठकर जप  होते हैं। विशेष  लाभके लिये सवा लाख का जप पूर्ण करे १. सूर्य

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Jap Sadhna Vidhi

जप साधना विधि १. वन्दे अर्हम. वन्दे जिनवरम्, वन्दे गुरुवरम् से प्रारम्भ । २. दिसा पूर्वाभिमुख, उत्तराभिमुख या ईशानकोण । ३. एकान्त तथा मक्खी मच्छर रहित स्वच्छ स्थान। ४. शस्त्र श्वेत या हल्के रंग के हो। आसन खद्दर या ऊनी। ५. नियत आसन (पद्यासन, सिद्धासन या सुखासन) में बैठकर नासाग्र या भृकुटि पर ध्यान केन्द्रित।

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Barah Bhawna

बारह भावना १. अनित्य भावना  राजा राणा छत्रपति, हाथिन के असवार ।  मरना सबको एक दिन, अपनी-अपनी बार ॥ २. अशरण भावना दल-बल देवी देवता, मात-पिता परिवार ।  मरती बिरियां जीव को, कोई न राखनहार ॥ ३. संसार भावना दाम बिना निर्धन दुःखी, तृष्णा-वश धनवान ।  कहूं न सुख संसार में, सब जग देख्यो छान

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Vrihad Mangalpath(Badi Manglik)

बृहद् मंगल-पाठ प्रातःकाल पूर्वाभिमुख होकर एकाग्रचित्त से अपने आप को मंगलमय अनुभव करते हुए बृहद् मंगल पाठ बोलें। णमो अरहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं । एसो पंच णमुक्कारो, सव्व पावपणासणो । मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं ॥ चत्तारि मंगलं-अरहंता मंगलं, सिद्धा मंगलं, साहू मंगलं, केवलिपण्णत्तो धम्मो मंगलं। चत्तारि लोगुत्तमा

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Vandanpath

वंदना पाठ वंदना पाठ तिक्खुतो आयाहिणं पयाहिणं करेमि वंदामि  नमंसामि सक्कारेमि सम्माणेमि कल्लाणं  मंगलं देवयं चेईयं पज्जुवासामि मत्थएण वंदामि। तीन बार दाई से बायी  ओर प्रदक्षिणा करता हूं। स्तुति करता हूं। नमस्कार करता हूं। सत्कार करता हूं। सम्मान करता हूं। आप कल्याणकारी हैं। आप मंगलकारी है। आप धर्मदेव हैं। आप ज्ञानवान हैं। सेवा करता हूं

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Guru Vandana

गुरु वन्दना युग प्रणेता, युग प्रचेता, युग पुरुष लो वन्दना  विनयनत बद्धांजलि हम, कर रहे अभिवंदना । धन्य है सौभाग्य तुम से, कुशल अनुशास्ता मिले  दिव्य जीवन पा तुम्हीं से, भव्य शतदल हैं खिले ।  तपो युग-युग धर्म शासक, जयविजय पग-पग वरो । तुम्हीं नैया के खेवैया, पार भव जल से करो ॥ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः,

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