यह सरस गीत संग्रह का एक भजन है — पारंपरिक भक्ति की धरोहर। A devotional song from the Saras Geet collection.
बस इतना ही संग था तुम्हारा हमारा,
जाओ बेटी खुश रहना ले लो आशीष हमारा,
बस इतना ही संग था तुम्हारा हमारा
कोई बदल ना पाया ये दस्तूर पुराना
छोड के माँ का आँचल संग पिया के जाना
हुई परायी रहा न तुम पर वो पर वो अधिकार हमारा,
बस इतना ही संग था संग था था तुम्हारा,
तू मेरे घर की बाती वो घर रोशन करना
मेरे नयन की ज्योति चांद वहां तुम बनना
वो आँगन आबाद हुआ घर सुना हुआ हमारा
बस इतना ही संग था तुम्हारा हमारा
छोड़ मायका इक दिन हर बेटी को है जाना
मां की सोन चिरैया यह घर हुआ बेगाना
तेरी बहने तेरे बिन हो गई बेसहारा