यह जैन तीर्थंकरों और संतों की वंदना का भजन है — भक्ति और स्वाध्याय के लिए। A Jain devotional song honoring the Tirthankaras and saints.
भिक्षू आरती
लय : खम्मा खम्मा औ धण्या
आओ आओ ओ भिक्षु आरती उतारां
थाने म्है सुमरां सारा, राम नाम ज्यूं धनश्याम नाम ज्यूं, आओ आरती उतारा
एक लक्ष्य एक ध्यान, सीख्यो नही रुकणो
वीर वो ही जो न जाणे, विपदा में झुकणो हो..
शंकर ज्यूँ विष भी, पीयो आराम स्यूं…१
साधना के क्षेत्र में थे, खाणो पीणो भूलग्या
सामने संघर्ष तो भी, शान्ति झूले झूलग्या हो
छत भी बणगी, थारै शहर गाम ज्यू…२
बिखया मत्तीरा ने थे, बांध्या एक बाह में
सुझ-बुझ द्वारा एक, तन्त्र छत्र छांह में हो
अनुशासन बद्ध बणाया, एक लगाम स्यूं… ३
कोरी संख्या वृद्धि नै थे, गौण सदा मानता
शासन प्रभावना, आचार री प्रधानता
हो पेड़ गिण्या कद मतलब, राख्यो आम स्यूं…४
थारे उपकार पर म्है, तन मन वार यां
उरिण न होवा नाथ, कांई उपहार यां हो..
पनही मंढ़ावा मधुकर चाहे चाम स्यूं…५